क्या 15 अगस्त 1947 को भारत वास्तव में एक स्वतंत्र राष्ट्र था ?
15 अगस्त का दिन, जिसे हर वर्ष देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, को क्या हमारा भारत वास्तव में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हो गया था ? उत्तर है नहीं ! आइये, एक विश्लेषण करते हैं। ये तथ्य देखें —
- 1. उस समय भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंग्लैंड के राजा किंग जॉर्ज (छठवें) थे, जिनके प्रतिनिधि के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन भारत के वायसराय थे।
- 2. भारत का सर्वोच्च न्यायालय प्रिवि काउंसिल ब्रिटेन था।
- 3. भारतीय सेना के तीनों सेनाध्यक्ष अंग्रेज़ थे।
- 4. श्री जवाहरलाल नेहरू ने भी 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ, इंग्लैंड के महाराजा के प्रति निष्ठा जताते हुए ली थी।
"I, Jawaharlal Nehru, being chosen as Prime Minister of India, do solemnly affirm that I will be faithful to His Majesty King George the Sixth, in the office of Prime Minister."
"मैं, जवाहरलाल नेहरू, भारत के प्रधान मंत्री के रूप में चुना गया हूँ, सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं प्रधान मंत्री के पद में महामहिम राजा जॉर्ज षष्ठम (King George VI)के प्रति वफादार रहूँगा।"
- 5. भारत का अपना कोई संविधान नहीं था। भारत का अपना संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।
- 6. भारत का कोई राष्ट्रगान नहीं था।
- 7. भारत के उस दिन 565 टुकड़े थे न कि एक देश था |
उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 15 अगस्त 1947 को भारत केवल एक औपनिवेशिक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, पूर्णतः स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में नहीं ! उसके uske 565 टुकड़े थे, जिनमें से पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान तो अलग देश बन गये और बाकी टुकड़े सरदार पटेल के कारण भारत में जुड़े | काश्मीर रियासत, जहाँ सरदार पटेल नहीं गये वह आज भी रक्त रंजित है |
क्या 15 अगस्त 1947 जश्न मनाने का समय था या आज है ?
- 1. यह प्रश्न बहुत से लोगों को अटपटा लग सकता है I
- 2. परन्तु यह सच है कि 1947 का वह दिन भारत के इतिहास का एक काला दिन था,
- 3. जिस दिन लाखों लोगों के जीवन भारत-विभाजन की विभीषिका में झुलस गए हों और असमय काल का ग्रास बन गए हों; जिस दिन हजारों मान बहनों की अस्मिता लूटी गयी हो, असंख्य लोगों का जबरन धर्मांतरण कराया गया हो उस दिन वह ही जश्न मन सकता है जो पूर्णतः संवेदन शुन्य हो एवं जिसकी आत्मा मृत हो |
- 4. आज भी 15 अगस्त के दिन भारत की आज़ादी का जश्न मनाते समय हम 1947 के भारत-विभाजन की त्रासदी भूल जाते हैं |
- 5. हम भूल जाते हैं कि भारत के बँटवारे के उस भयावह दौर में 15 से 20 लाख लोगों ने अपनी जान गवांई थी, न जाने कितनी माँ-बहनों की अस्मिता लूटी गई थी, और न जाने कितने घर उजड़ गए थे।
- 6. हमारा कहना है कि किसी भी देशभक्त को १५ अगस्त का दिन हर्षौल्लास के साथ नहीं मनाना चाहिए |
भारत का स्वतंत्रता दिवस कौनसा होना चाहिए ?
उपरोक्त प्रश्न का उत्तर खोजने से पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका का उदाहरण देखें —
- 1. संयुक्त राज्य अमेरिका अंग्रेज़ोंकीदासताझेलरहा था एवं अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत था कि उसने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा 4 जुलाई 1776 को कर दी |
- 2. इंग्लैंड द्वारा उनकी घोषणा को स्वीकार नहीं किया गया । संघर्ष चलता रहा एवं वे अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ते रहे।
- 3. लगभग 7 वर्षों के संघर्ष के उपरांत 3 सितंबर 1783 को इंग्लैंड एवं विभिन्न उपनिवेशों के मध्य पेरिस में संधि हुई, और इस तरह संयुक्त राज्य अमेरिका को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी गई।
- 4. यह महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने स्वतंत्रता दिवस के लिए 4 जुलाई का दिन ही चुना है, न कि 3 सितम्बर |
- 5. यह निर्णय न केवल उनके राष्ट्र प्रेम को प्रदर्शित करता है वरन् यह उन सब शहीदों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धांजलि है जिन्होंने अनेक वर्षों के लंबे समय तक इंग्लैंड के साथ संघर्ष एवं युद्ध किया एवं स्वतंत्रता पाने के लिए अपने बलिदान दिए।
21 अक्टूबर: स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का गौरवशाली दिवस
21 अक्टूबर 1943 का गौरवशाली दिन भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
- 1. इस दिन जब नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में भारत को स्वतंत्र घोषित किया था।
- 2. इसी दिन नेताजी ने अखंड अविभाजित भारत की अनंतिम सरकार, आज़ाद हिंद सरकार के गठन की घोषणा की थी।
- 3. उस समय स्वतंत्र भारत कि मान्यता के लिए सभी आवश्यक मानक पूरे थे।
- I. आज़ाद हिंद सरकार के सर्वोच्च नेता प्रधानमंत्री के तौर पर स्वयं Netaji थे।
- II. जापान, जर्मनी, इटली, फिलिपींस, कोरिया, चीन, आयरलैंड समेत नौ देशों ने इस सरकार को मान्यता दी थी।
- III. इसका अपना संविधान था |
- IV. अपना राष्ट्र गान था |
- V. अपनी सेना थी |
- VI. अपनागुप्तचरतंत्रथा,
- VII. अपनारेडियोस्टेशन 'आज़ादहिन्दरेडियो' था।
- VIII. अपना न्यायालय था |
- IX. अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी,
- X. अपना डाक टिकट था,
- 4. आज़ाद हिन्द सेना के वीरों का संघर्ष चलता रहा,
- 5. सबके संयुक्त प्रयास से अंग्रेज़ों को सत्ता भारत के राजनीतिज्ञों को सौंपनी पड़ी।
- 6. 21 अक्टूबर 1943, जब नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्र भारत की घोषणा की थी, तब वह अखंड एवं अविभाजित भारत की स्वतंत्रता की बात थी, न कि 1947 की तरह एक खंडित एवं विभाजित भारत की।
21 अक्टूबर को मनाएं अखंड भारत का स्वतंत्रता दिवस
उपर्युक्त कारणों से 21 अक्टूबर का दिन हर वर्ष देश भर में हर्षोल्लास के साथ भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए । यह सभी ज्ञात एवं अज्ञात क्रांतिकारियों, बलिदानियों, शहीदों, आन्दोलनकारियों को संपूर्ण देश की श्रद्धांजलि होगी ।
15 अगस्त हो प्रार्थना एवं संकल्प दिवस
- 1. 15 अगस्त का दिन हर्षोल्लास के स्थान पर सादगी, आध्यात्मिकता, और राष्ट्रीयता के भाव के साथ मनाया जाना चाहिए ।
- 2. इस दिन सभी देशवासी उन लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाकरें जिन्होंने भारत के विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गवां दिये,एवं अकल्पनीय यातनाएं सहीं |
- 3. इस दिन संकल्प लें कि हम सभी देशवासी पुनः किसी न किसी रूप में अखंड भारत की स्थापना करेंगे।
सुभारती समूह की मुहिम से जुड़े !
- 1. बीते दशकों पर नज़र डालें तो पाते हैं कि अमर क्रांतिकारियों, शहीदों,नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज के बहादुर सैनिकों ने इस देश के लिए जो किया उसका महत्व हम लोग कहीं न कहीं देर से समझ पाए हैं, या अभी तक समझे ही नहीं हैं।
- 2. 21 अक्टूबर का इतिहास जानते ही कितने लोग हैं ? विद्यालयों में पढ़ायी जा रही इतिहास की पुस्तकों में भी इस तिथि का उल्लेख नहीं मिलता।
- 3. मेरठ में स्थित सुभारती विश्वविद्यालय एक संस्था है जहाँ 21 अक्टूबर के दिन को अखंड भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाये जाने की परंपरा वर्षों से है।
- 4. आज आवश्यकता है कि देश में हर आयु व हर वर्ग का नागरिक अमर क्रांतिकारियों, नेताजी सुभाषचंद्र बोस व आज़ाद हिंद फ़ौज के इतिहास को जाने और 21 अक्टूबर का महत्व समझे।
- 5. किसी भी देश में क्रांति वहां के युवा मन की सोच के अनुरूप आती है। सुभारती समूह का यह निरंतर प्रयास है कि इस मुहिम को विभिन्न विद्यालयों में ले जाकर युवाओं को इस सम्बन्ध में जागरूक किया जाय, और युवा वर्ग के अतिरिक्त समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को भी इस मुहिम से जोड़ा जाय।
1857 में मेरठ से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति उदित हुई थी। चलिए, एक और राष्ट्रीय क्रांति मेरठ से आरंभ करें !
डॉ०अतुल कृष्ण ( संस्थापक, सुभारती समूह )
संपर्क
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